कितने आज़ाद कितने गुलाम
आज़ादी की 73वीं वर्षगांठ 15 अगस्त 2019 और इसके साथ कुछ विचारणीय प्रश्न | राजनैतिक आज़ादी के 7 3 वर्षों के बाद भी हम कितने आज़ाद और कितने गुलाम हैं ? क्या हम मानसिक रूप से आज़ाद हो पाए हैं ? या पुरातन सामाजिक बुराइयों की बेड़ियों से आज तक जकड़े हुए हैं ? लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद हर वो शख्स जो राजनीति में हिस्सा लेना चाहता है क्यों नहीं ले पाता ? सबके लिए कानून एक समान होने के बावजूद लोगों को पुलिस और न्यायालय से डर क्यों लगता है ? जो हमारी सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं उन्हीं संस्थाओं के पास जाने से आम आदमी क्यों बचना चाहता है? क्यों ज्यादातर व्यक्ति राजनैतिक शक्ति प्राप्त करना चाहते हैं ? क्या आम इन्सान के लिए कोई अधिकार नहीं बनाये गए ? वास्तव में जो कानून है उसमें कोई बुराई नहीं है | इस संसार का जो भी व्यक्ति भारतीय संविधान और कानून को पढ़ता है उसका बखान करने से नहीं रह पाता है | हकीकत भी यही है कि संविधान या कानून में कोई खास कमी नहीं है | फिर यह प्रश्न लाजिमी है कि यह...