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Showing posts from July, 2021

साइलेंट डिस्टर्बिंग ध्वनि

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दिन भर थक हार कर घर पहुंचा। पानी पिया।  तबियत थोड़ी  ठंडी हुई। और ठंडक पाने की खातिर ऊपरी पोर्च में प्लास्टिक की कुर्सी डालकर ठंडी हवा लेने के लिए बैठ गया। तन मन में थोड़ी हरियाली आयी तो आंख बंद कर पिछली दीवार के सहारे सर टिकाकर पुरानी  सिंदूरी शाम में खोने लगा। प्राकृतिक हरियाली के बीच अपने आशियाने में वापस लौटते पक्षियों के  कोलाहल के साथ ताल मिलाकर  माशूका के सुर में सुर मिलाने की कोशिश करता हुआ आगे बढ़ रहा था। उनकी सुरीली आवाज का माधुर्य इतना कर्ण प्रिय लग रहा था कि सारा कोलाहल अब उनकी ध्वनि की तीव्रता और तारत्व के साथ लय के चढ़ाव-उतार में तब्दील हो गया था। beautiful moment of life आनंद के इस क्षण की अनुभूति किसी  मोक्ष से कम नहीं। मोक्ष प्राप्त करने का यह योग न जाने कितने दिन की तपस्या के बाद कुछ क्षण के लिए आता है। ऐसे क्षण में भी मोक्ष प्राप्त करने के लिए योग के कुछ नियम व शर्तें होती हैं । इसीलिए कभी-2 ऐसा हो जाता है कि क्षण तो आ जाता है परंतु  योग के जो नियम और शर्तें होती हैं उनके अनुसार योग न करने से यूं समझिए कि मोक्ष मिलते-2 रह जाता है। ...

अज्ञानी ब्रह्म - मनुष्य

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self motivation कहानियां  लाख होती हैं स्वयं के आसपास  कमजोर होती हैं नजरें हमारी जो ढूंढती हैं कुछ  खास   यही  फितरत होती है  इंसान की सबसे बकवास कदर  नहीं करता है वह जो कुछ रहता है उसके पास  अंधा है वह और  है अंधा उसका विश्वास आप स्वयं वह अच्छा होता है  फिर भी करता है अच्छे की  तलाश नजरें कमजोर हैं हमारे  संस्कारों की जो खुद का नहीं कराती  एहसास दूसरों से तुलना करके कि हम भी होते ऐसे  काश सोच कर इस तरह कर लेते हैं अपने आत्मबल का  सत्यानाश   चल छोड़ यह सब दौड़ अब बनाकर अपनी  कदमताल   ना मिले  मृदंग तेरे ढंग का  तो खुद बजा  करताल  तू ही कारण है  आज जो है ये तेरा हाल  भूल मत तू  ब्रह्म है  तू ही है  ब्रह्मपाल  चल बदल ये  हाल अब मिल गया है मन्त्र सब हो अब निहाल ।।