साइलेंट डिस्टर्बिंग ध्वनि
दिन भर थक हार कर घर पहुंचा। पानी पिया। तबियत थोड़ी ठंडी हुई। और ठंडक पाने की खातिर ऊपरी पोर्च में प्लास्टिक की कुर्सी डालकर ठंडी हवा लेने के लिए बैठ गया। तन मन में थोड़ी हरियाली आयी तो आंख बंद कर पिछली दीवार के सहारे सर टिकाकर पुरानी सिंदूरी शाम में खोने लगा। प्राकृतिक हरियाली के बीच अपने आशियाने में वापस लौटते पक्षियों के कोलाहल के साथ ताल मिलाकर माशूका के सुर में सुर मिलाने की कोशिश करता हुआ आगे बढ़ रहा था। उनकी सुरीली आवाज का माधुर्य इतना कर्ण प्रिय लग रहा था कि सारा कोलाहल अब उनकी ध्वनि की तीव्रता और तारत्व के साथ लय के चढ़ाव-उतार में तब्दील हो गया था। beautiful moment of life आनंद के इस क्षण की अनुभूति किसी मोक्ष से कम नहीं। मोक्ष प्राप्त करने का यह योग न जाने कितने दिन की तपस्या के बाद कुछ क्षण के लिए आता है। ऐसे क्षण में भी मोक्ष प्राप्त करने के लिए योग के कुछ नियम व शर्तें होती हैं । इसीलिए कभी-2 ऐसा हो जाता है कि क्षण तो आ जाता है परंतु योग के जो नियम और शर्तें होती हैं उनके अनुसार योग न करने से यूं समझिए कि मोक्ष मिलते-2 रह जाता है। ...