Posts

Showing posts from October, 2020

न कि जीवन से ज्यादा हो

 कुछ उम्मीदें तुम हमसे रखो  कुछ आशाएं हम तुमसे रखें  लेकिन जिसकी अपनी मर्यादा हो | जीवंत करे जो जीवन को  न कि जीवन से ज्यादा हो | गीत रखो  कुछ  मीत रखो  एक जग अपना और अपने  जगजीत रखो | जिसमें हिस्सा सबका आधा आधा हो | लेने वाले हों  जिसमें सब   और  जिसका  हर कोई  दाता हो | जीवंत करे जो .......... चार जनों संग चौराहे पर  कुछ लोग बाग़ कुछ अपनी चीज़ें  चाय की चुस्की में काम जहाँ चुक जाता हो |  कोई धन आये या न आये जहाँ  पर सुख से जीवन जीना आ जाता हो | जीवंत करे जो .......... बाँध  रखो हरदम बचपन को  बेफिक्री और उन्मादीपन को  चाहे जिस पड़ाव पर जीवन जाता हो | हम ख़ुशी में सोयें हम ख़ुशी में रोयें  ख़ुशी से ऐसा तगड़ा नाता हो | जीवंत करे जो .......... बोझ लिए क्यों दबा है मन   क्यों भारी-2  रूठा -2 है जीवन  क्यूँ अपना अस्तित्व भुलाता है | चल तरंग  ख़ुशी की उस हलचल पर  जिसमें घुलमिल आनंद नहाता हो | जीवंत करे जो .......... गीत मीत बचपन बेफिक्री व नादानी  जीवन सरल ...