नींद नहीं आती है रातों में- Insomnia
नींद नहीं आती है रातों में- Insomnia
![]() |
| Insomnia |
नींद नहीं आती है रातों में, अरे यह तो प्रेम छे प्रेम छे प्रेम छे
प्रेम छे | तो भईये मार पीट कर लें का ? अभी तो नींद आ ही नहीं रही है तब तो उड़ ही
जाएगी | टेंसन और हो जाएगी | नींद फिर और नहीं आएगी | तो फंडा यह है गुरु कि कुछ
भी करौ मगर टेंसन को दिमाग की कोठरी में जगह मत दो |
हाँ भाई आजकल की एक बड़ी समस्या है लोगों को नींद न आना | सबसे बड़ा
कारण लोग तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं जिसकी वजह से दिमाग में तनाव 24×7 रहता भी है | लगभग
हर आयु वर्ग इस समस्या से जूझ रहा है |
ज्यादा इधर उधर की बातें न करते हुए मैं सीधे मुद्दे पर आता हूँ
क्योंकि शब्दों की संख्या बढ़ाना उद्देश्य नहीं है | इसी लिए मैं यहाँ कोई शारीरिक
और रासायनिक प्रक्रिया का जिक्र नहीं करूँगा न ही मुझे इसका कोई ज्यादा ज्ञान है | यह विशुद्ध रूप से अनुभव आधारित
ज्ञान है |
मेरा अनुभव यह है कि शरीर में एक संघर्ष चलता रहता है थकान और आराम के
बीच | संघर्ष का अर्थ यह है कि एक बार थकान हावी होती है और एक बार आराम | जब थकान
आपके ऊपर हावी हो जाती है तो बारी आती है आराम की | आराम की जब वास्तव में बारी
आती है तो नींद उसकी चरम होती है | कहने का अर्थ यह है कि अगर आप को नींद नहीं आ
रही है तो इसका मतलब है आप शरीर को उस सीमा तक नहीं थका पा रहे हैं जहाँ पहुँच कर
वह नींद को आपके मस्तिष्क में सारे विचारों से ऊपर खींच लाये |
बहुतों को यह लगता है कि मैं तो बहुत मेहनत करता हूँ थक भी जाता हूँ
पर नींद नहीं आती है | तो आप लोगों को यह जान लेना चाहिए कि आपके लगने से कुछ नहीं
होता, जो लगना चाहिए वह शरीर को | फिर आप कहेंगे कि थक जाता हूँ लेकिन मुझे भविष्य
की चिंता के कारण नींद नहीं आती | तो आप एक उदाहरण देखिए | एक दिहाड़ी मजदूर या दिनभर
रिक्शा खीचने वाला खूब अच्छी नींद सोता है जबकि उसका भविष्य कितना सुरक्षित है यह
आप खुद समझ रहे हैं | वह इतनी ज्यादा मेहनत कर देता है कि उसकी भविष्य की चिंता के
ऊपर उसकी थकान हावी हो जाती है |
कहने का अर्थ यह है की विचार शून्य की अवस्था को प्राप्त करना हमारा
लक्ष्य होना चाहिए | इसके बहुत साधन या तरीके भी मौजूद हैं | कुछ बुरे, कुछ अच्छे
| बुरे तरीकों में कुछ लोग शराब पीते हैं, कुछ ड्रग्स लेते हैं, कुछ दवाएं लेते हैं
आदि आदि | अच्छे तरीकों में लोग योग, कसरत
या व्यायाम करते हैं | लेट कर अच्छी पुस्तकें पढ़ते हैं | यह सारी चीज़ें एक काम
करती हैं हमारे सोचने की क्षमता कम कर देती हैं | अर्थात विचारशून्य की दिशा में
ले जाती हैं | लेकिन मेरा अनुभव यह कहता है कि सकारात्मक उपाय ही अपनाने चाहिए |
इसके लिए आप उस स्तर तक शारीरिक श्रम कीजिये जब आपको लगे कि अब मुझसे खड़ा न रहा
जायेगा | स्तर का ख्याल जरुर रखें | मुझे योग या घर में बंद होकर करने वाले व्यायाम पर कम भरोसा है | मेरा कहना है कि आपको इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि
व्यायाम करते समय खुली और शुद्ध ऑक्सीजन जब आपकी नसों में जाती है तो शरीर की
अशुद्धि पसीना बनकर शरीर के हर कोने से बाहर आ जाती है | शरीर से यह अशुद्धि शराब, धुम्रपान या ड्रग्स नहीं निकाल पाते |
इसलिए सदैव सकारात्मक साधन अपनाने चाहिए | इसके लिए सबसे अच्छा और
सस्ता तरीका है आप खुले वातावरण में दौड़िए | तब तक दौड़ते रहिये जब तक आप को ऑक्सीजन की कमी न महसूस होने लगे | पसीना आपके शरीर की अशुद्धियों को बाहर न बहा
ले जाये | आपको यह न लगे कि अब मैं गिर जाऊंगा | लेकिन आप फिर भी न रुकिए | बहुत
हो तो पैदल चलने लगिए | 3 से 5 मिनट में पुनः ऊर्जा का संचार होने पर फिर दौड़िए |
यह प्रक्रिया जब तक मन करे करते रहिये | अगर थोड़ा कम समय में ज्यादा ऊर्जा खर्च
करना है तो आप तैराकी कर सकते हैं | 2 किलोमीटर दौड़ने से ज्यादा 200 मीटर तैरने में
ऊर्जा खर्च होती है |
तो सकारात्मक सोच के साथ सकारात्मक वातावरण में सकारात्मक साधन से शारीरिक
अभ्यास कीजिये सच मानिये आपको डॉक्टर, डाईटिसियन, योग गुरु की कभी कोई जरुरत नहीं
पड़ेगी |
जाते जाते एक और छोटा गुरु ज्ञान ले लीजिये | अगर ऊपर वाली तरकीब करने
का मन न करे और खुद पे बहुत ज्यादा भरोसा है तो एक काम कीजिये | अपने आस पास के
किसी किसान भाई के खेत में जाइये और बोलिए कि हमको आपसे कम्पटीशन करना है | या
बनते हुए घर में काम कर रहे किसी लेबर को चैलेंज दीजिये और फिर शुरू हो जाइये | देखिए कि हम कितने पानी में हैं और हमारा अन्नदाता कितने लीटर पसीने की कमाई से हम
लोगों को खिलाता पिलाता है | आप उसकी मेहनत का अनुसरण कीजिये | तो देखिए | देखते
देखते पूरा संसार भूल जायेगा आपको | बिस्तर क्या आपको बैठे बैठे ही गहरी नींद न आ
जाये तो नाम बदल देना मेरा गंगू |

I found it very practical cure of insomnia(अनिद्रा).it's my humble request to all readers to read this blog and try to adopt the idea given in this article.
ReplyDeleteDear Satish, thnx for your valuable comment and recommendation..🙏
DeleteSperb idea given in this blog by the writer .actually the problem is very common with all in present time .
ReplyDeleteThank you very much ...
DeleteRealistic approach... good thoughts
ReplyDeleteThnx for analysis..
ReplyDeleteNice one sir...
ReplyDeleteThnx for your appreciation..
ReplyDeleteAkhilesh sir very nice story. 👌👌👌🙏
ReplyDeleteThnx dear...
ReplyDeleteVery nice sir
ReplyDeleteThnx dear..
DeleteSuper sir
ReplyDeleteThnx
ReplyDeletegreat toppic sir very interesting
ReplyDeleteTopic
Neend Nahi Aati He Rato Me
Thanx sir
great toppic sir very interesting
ReplyDeleteTopic
Neend Nahi Aati He Rato Me
Thanx sir
Aapka pyar..
ReplyDelete