सावन : कुछ तथ्य





सावनहिन्दू धर्म का एक पवित्र महीना होता है | इस दौरान बहुत से पर्व-त्यौहार मनाये जाते हैं और बहुत सारी चीज़ें परम्परावश की जाती हैं परन्तु उसका सही-सही कारण हमें पता नहीं होता है | इस लेख में सावन के कुछ ऐसी ही परम्पराओं का हम तार्किक ढंग से विश्लेषण कर रहे हैं |

  झूले क्यों पड़ते हैं ?


वैसे तो आजकल बहुत प्रकार के मकैनिकल और इलेक्ट्रिकल  झूले प्रचलन में हैं | विज्ञान और तकनीक के साथ इनका आकार-प्रकार और स्वरुप बदलता रहता है | मेरा मतलब यहाँ इन झूलों से न होकर परम्परागत झूलों से है | जिसे लोग अपने गाँव और मोहल्ले में पेड़ों की डाली पर रस्सी और लकड़ी के पटरे की सहायता से बनाते थे | दोनों किनारों पर दो लोग एक दुसरे को देखते हुए रस्सी पकड़ कर खड़े होते और बारी-बारी पैर से पेंग मार कर झूले को दोलन की भांति गतिमान रखते थे | जिसका प्रचलन अब समाप्त सा हो गया है | जो अब पुस्तकों के पन्नों तक ही सिमट कर रह गया है | सावन का महीना उमस भरा होता है | आप सावन के महीने में देखते होंगे कि हमारी शरीर से उत्सर्जित पसीना साधारणतया जल्दी नहीं सूखता | यह टपकता है | जिसकी वजह से कुछ लोग इसे सड़ी गर्मी भी कहते हैं | इसका कारण इस दौरान वातावरण की आपेक्षिक आर्द्रता (humidity) का बढ़ जाना है | यानि अन्य मौसम की तुलना में इस मौसम में अधिक जल वाष्पित होकर हवा में घुल जाता है जिससे वायु में जलवाष्प की मात्रा बढ़ जाती है | अर्थात वायु में नमी ज्यादा हो जाती है जिस कारण हमारी शरीर का पसीना यह वायु जल्दी अवशोषित नहीं कर पाती क्योंकि हवा में इस पसीने को अवशोषित करने के लिए जगह नहीं बचती या कम बचती है | पसीने का जल्दी से वाष्पीकरण नहीं हो पाने के कारण यह हमारी त्वचा पर ही बना रहता है | जिसकी वजह से हमें चिपचिपाहट का अनुभव होता है | इस चिपचिपाहट से बचने के लिए हम वह यन्त्र या जगह की तलाश करते हैं जहाँ हमारे शरीर को हवा लगे जैसे पंखा, कूलर या एसी ताकि वह हवा का क्रम लगातार बदलता रहे और पास आने वाली हवा पसीने को त्वचा से अवशोषित कर ले | पहले यह यन्त्र नहीं हुआ करते थे | तो लोग इस प्रकार की गर्मी से निजात पाने के लिए झूला डालते थे | उस पर बैठकर जब झूले को झुलाया जाता तो गतिमान होने के कारण हवा हमारी शरीर से टकराती और शरीर पर लगे हुए पसीने को अवशोषित कर लेती और आगे बढ़ने पर दूसरी हवा उसकी जगह आ जाती यानि हवा का क्रम लगातार बदलता रहता जो पसीने को अवशोषित करने में सक्षम होती और इस प्रकार हमें ठंडक का अहसास होता | 


 सावन माह में शिव की ही आराधना क्यों की जाती है ? 


 भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार जब राजा बलि स्वर्ग प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहा था तो स्वर्ग के राजा इंद्र घबरा गए कि उनका राज्य छिन जायेगा | मदद के लिए वे विष्णु के पास गए और उनसे याचना की, तब भगवान् विष्णु वामन (बौने) का रूप धारण कर बलि के पास गए और उनसे भिक्षा मांगी | बलि ने पूछा, क्या चाहिए ? तो वामनावतारी विष्णु ने कहा तीन पग जमीन | बलि ने कहा नाप कर ले लो | विष्णु ने जब दो पग में ही पूरा ब्रह्माण्ड नाप लिया | तब उन्होंने बलि से पूछा, तीसरा पग कहाँ रखूं ? यह सुनकर राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया | जिस पर पैर रखने से बलि पाताल लोक पहुँच गए | भगवान विष्णु राजा बलि के दानवीरता से प्रसन्न होकर बलि को पाताललोक का राजा बना दिया और उसकी इच्छा पूछी | उसने कहा, भगवन, जब भी मैं सोकर जागूं तो आपके दर्शन हों | राजा बलि की इच्छा पूरी करने के कारण भगवान विष्णु को बलि का दरबारी बन कर रह जाना पड़ा | अब मृत्युलोक में सृष्टि का संचालन कौन करे ? यह प्रश्न उठ खड़ा हुआ तो मृत्युलोक का कार्यभार भगवान शिव को दे दिया गया | तब सावन का महीना था और इस महीने भर भगवान शिव मृत्युलोक के कार्यकारी रहे | इसी लिए सावन के महीने में भगवान शिव की ही आराधना की जाती है | 


 सावन की पूर्णिमा को रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ? 



Raksha Bandhan, Raksha Bandhan images
Raksha Bandhan


 भगवान विष्णु के बलि के दरबार में रह जाने से माता लक्ष्मी की पूजा नहीं हो पा रही थी | उन्होंने नारद ऋषि से इसका निदान पूछा तो उन्होंने इसका उपाय बताया | जिसके अनुसार माता लक्ष्मी सावन की पूर्णिमा के दिन राजा बलि के दरबार में गयीं और उसकी कलाई पर रक्षा बांधकर अपना भाई बनाया | तब बलि ने बहन लक्ष्मी से उनकी इच्छा पूछी ? लक्ष्मी जी ने कहा कि वह भगवान विष्णु को उनके साथ जाने दे | तभी से यह दिन रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाने लगा |


 मांसाहार और हरी पत्तेदार सब्जियां का सेवन क्यों उचित नहीं ? 


 यह मौसम जानवरों और मछलियों के प्रजनन का समय होता है | साथ ही इस समय छोटे छोटे विभिन्न प्रकार के नुकसानदायक कीड़े मकोड़ों की उत्पत्ति होती है, जिनका निवास घास और हरी पत्तेदार सब्जियां होती हैं | जानवर इनका सेवन करते हैं | आपने यदि ध्यान दिया हो तो देखा होगा कि इस समय जानवरों में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ जैसे मुंहपका खुरपका ज्यादा होती हैं | जिनके फैलने की संभावना ज्यादा होती है | इसीलिए इस समय मांस, मछली, कच्चा दूध और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनके सेवन से पेट और त्वचा सम्बन्धी बीमारियों के होने का खतरा अधिक होता है | 

 सर्पदंश की संख्या क्यों बढ़ जाती है ? 


 बरसात में सांप और चूहे जैसे जानवरों के घरों में पानी भर जाता है | शुष्क स्थान की तलाश में ये जानवर मानव बस्तियों की तरफ रूख करते हैं | साथ ही यह समय विषैले सर्पों जैसे कोबरा आदि का प्रजनन काल भी होता है | मानव बस्ती में होने के कारण इनका सामना अक्सर लोगों से होता रहता है | जिसकी वजह से सांपों को हमेशा बाधा का सामना करना पड़ता है | जिससे साँपों का स्वाभाव इस समय चिडचिडा हो जाता है और गुस्से में लोगों को डंसना शुरू कर देते हैं | सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने का यही कारण है | पौराणिक कथाओं के अनुसार इनसे बचने के लिए ही इस समय नागपंचमी भी मनाई जाती है | जो लोगों को मानसिक संतोष प्रदान करती है कि सांप की पूजा से अब वे उनको नहीं डंसेंगे |

 आशा करता हूँ कि अब इन परम्पराओं से जुड़े कृत्यों की वास्तविक उपयोगिता के बारे में आप जान चुके होंगे | इसकी तार्किकता, मान्यता और वैज्ञानिकता को बेहतर तरीके से समझ गए होंगे |

Comments

  1. Garamin parivesh ka saral aur satik vyakhya ...🤗

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  2. Bahut badhiya vyakhaya kiya bhai 👍👍🌹🌹🌹

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    1. अनुमोदन के लिए धन्यवाद महोदय।।

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  3. बड़े भाई बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया है आप की लेखन शैली सदैव निरन्तर अग्रसर हो

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  4. धन्यवाद। आपकी टिपण्णी बहुत प्रेरणादायक है।

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  5. बहुत ही उत्तम कोटि के साथ अपनी संस्कृति की जानकारी प्राप्त हुई। धन्यवाद देता हूं सर

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    1. आपका बहुत बहुत आभार

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  6. Very minute and detailed analysis

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  7. Very minute and detailed analysis.

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  8. Bahut badhiya analysis kiye Bhai...dimag ki batti jal gayee.

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  9. Interesting read sir..... When is the book coming 😊

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  10. बहुत सुन्दर 🌹

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  11. बहुत सुंदर रचना

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  12. Akhilesh, paramparaon ko jivit rakhne ke liye and jankari dene ke liye dhanyawad. Age bhi esi jankariya dete rahain.

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  13. आप के द्वारा दिया तथ्य पूर्ण रूप से सटीक है I

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