अज्ञानी ब्रह्म - मनुष्य
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कहानियां लाख होती हैं
स्वयं के आसपास
कमजोर होती हैं नजरें हमारी
जो ढूंढती हैं कुछ खास
यही फितरत होती है
इंसान की सबसे बकवास
कदर नहीं करता है वह
जो कुछ रहता है उसके पास
अंधा है वह और
है अंधा उसका विश्वास
आप स्वयं वह अच्छा होता है
फिर भी करता है अच्छे की तलाश
नजरें कमजोर हैं हमारे संस्कारों की
जो खुद का नहीं कराती एहसास
दूसरों से तुलना करके
कि हम भी होते ऐसे काश
सोच कर इस तरह कर लेते हैं
चल छोड़ यह सब दौड़ अब
बनाकर अपनी कदमताल
ना मिले मृदंग तेरे ढंग का
तो खुद बजा करताल
तू ही कारण है
आज जो है ये तेरा हाल
भूल मत तू ब्रह्म है
तू ही है ब्रह्मपाल
चल बदल ये हाल अब
मिल गया है मन्त्र सब
हो अब निहाल।।

very nice
ReplyDelete👍👍👍 great sir !!
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