अज्ञानी ब्रह्म - मनुष्य


self motivation, poetry
self motivation



कहानियां लाख होती हैं

स्वयं के आसपास 

कमजोर होती हैं नजरें हमारी

जो ढूंढती हैं कुछ खास 

यही फितरत होती है 

इंसान की सबसे बकवास

कदर नहीं करता है वह

जो कुछ रहता है उसके पास 

अंधा है वह और 

है अंधा उसका विश्वास

आप स्वयं वह अच्छा होता है 

फिर भी करता है अच्छे की तलाश

नजरें कमजोर हैं हमारे संस्कारों की

जो खुद का नहीं कराती एहसास

दूसरों से तुलना करके

कि हम भी होते ऐसे काश

सोच कर इस तरह कर लेते हैं

अपने आत्मबल का सत्यानाश 


चल छोड़ यह सब दौड़ अब

बनाकर अपनी कदमताल 

ना मिले मृदंग तेरे ढंग का 

तो खुद बजा करताल

 तू ही कारण है 

आज जो है ये तेरा हाल 

भूल मत तू ब्रह्म है

 तू ही है ब्रह्मपाल

 चल बदल ये  हाल अब

मिल गया है मन्त्र सब

हो अब निहाल।।

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